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SDGs for All

SDGs for All is a joint media project of the global news organization International Press Syndicate (INPS) and the lay Buddhist network Soka Gakkai International (SGI). It aims to promote the Sustainable Development Goals (SDGs), which are at the heart of the 2030 Agenda for Sustainable Development, a comprehensive, far-reaching and people-centred set of universal and transformative goals and targets. It offers in-depth news and analyses of local, national, regional and global action for people, planet and prosperity. This project website is also a reference point for discussions, decisions and substantive actions related to 17 goals and 169 targets to move the world onto a sustainable and resilient path.

Photo: A health worker administers a vaccination against cholera to a young boy in Yemen. Credit: UNICEF/Saleh Bahless

शान बुकानन द्वारा

जिनेवा (IDN) – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 2020 की शुरुआत में जारी की गई गंभीर, वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों की एक सूची गहरी चिंता को दर्शाती है कि विश्व के नेता मुख्य स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और प्रणालियों में पर्याप्त संसाधनों का निवेश करने में विफल हो रहे हैं। जिनेवा स्थित यूएन एजेंसी का कहना है कि ऐसा करना जीवन, आजीविका और अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डाल रहा है।

यह सिफारिश करते हुए कि अधिक लोगों को उनके रहने के स्थान के समीप उनकी आवश्यक गुणवत्ता वाली सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने के लिए देश अपने सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत हिस्सा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च करें, WHO ने दशक भर के

चित्र सौजन्य: सुरक्षा अध्ययन संस्थान

जोनाथन पावर का दृष्टिकोण

 “हर जगह निर्धनता को सभी रूपों में खत्म करनासंयुक्त राष्ट्र के 17 लक्ष्यों में से पहला लक्ष्य है। नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि अत्यंत निर्धनता को समाप्त करने के लिए – प्रति वर्ष केवल $78 बिलियन डॉलर की लागत आएगी – जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.1% से भी कम है। दरअसल, ग्लोबल वार्मिंग का मुकाबला करने के लिए वित्तपोषण के मुकाबले अति निर्धनता को खत्म करने को प्राथमिकता देने का एक तर्क है। यह ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए आवश्यक राशि का जितना अनुमान लगाया जा रहा है, - ऊर्जा संबंधी मामलों पर $2.5 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष जो नवीकरणीय ऊर्जा पर अत्यधिक लक्षित है, उससे कहीं अधिक बहुत अधिक सस्ता अभियान है।

Photo credit: UN.

जे नेसत्रनिस द्वारा

न्यूयॉर्क (IDN) -संयुक्त राष्ट्र के कामकाज की धमकी देने वाले धन की कमी से कई संकटों के बीच,महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विश्व निकाय के अतिआवश्यक महत्व पर जोर देने वाली योजनाओं की घोषणा की है। उन्होंने, 2020 में संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ की स्मृति में, कहा कि हम चाहते हैं कि भविष्य के निर्माण में वैश्विक सहयोग की भूमिका में एक बड़ी और समावेशी वैश्विक बातचीत की सुविधा हो।

"संयुक्त राष्ट्र दिवस चार्टर के स्थायी आदर्शों पर प्रकाश डालता है, जो 74 साल पहले लागू हुए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि चार्टर,  तूफानी वैश्विक समुद्रों के बीच, हमारा साझा नैतिक लंगर बना हुआ है”।

चित्र का स्रोत: The Hindu में OpEd – For a malnutrition-free India

सुधा रामचंद्रन के द्वारा

बैंगलोर (IDN) – भारत को अपने बच्चों में शारीरिक वृद्धि दर की कमी को को कम करने के लिए दोगुना प्रयास करना होगा, न केवल इसलिए कि इससे बेहतर ढंग से उनका मानसिक एवं शारीरिक विकास होगा, उनकी सीखने की क्षमता में वृद्धि होगी और उन्हें अपने जीवन-स्तर को बेहतर बनाने के अवसर प्राप्त होंगे बल्कि इसलिए भी ताकि देश के राष्ट्रीय पोषण अभियान के द्वारा निर्धारित 2022 की अंतिम समय-सीमा के अंदर राष्ट्रीय पोषण के लक्ष्य को पूरा किया जा सके और वर्ष 2030 तक सस्टेनेबल डिवेलप्मेंट गोल्स (SDGs) को पूरा करने के लिए विश्व को सक्षम बनाया जा सके।

फोटो: बाकू, अज़रबैजान का एक दृश्य। क्रेडिट: कातसूहीरो असागिरी | IDN-INPS

सीन ब्यूकेनन द्वारा

न्यू यॉर्क (IDN) – दुनियाभर के उपासना स्थलों पर हाल ही में हुए घृणा से प्रेरित कई हमलों के बाद, 2 मई को आयोजित हुई अंतरसांस्कृतिक संवाद की एक संगोष्ठी में कहा गया कि “इन सभी नृशंस एवं कायरतापूर्ण हमलों में... हमें एक तरह की समानता दिखाई देती है: ‘दूसरे’ से घृणा। ये अपराधी संपूर्ण आस्था समुदायों को अपने प्रभाव में लेकर, धर्मों को एक दूसरे के विरुद्ध खड़ा कर रहे हैं।”

अलाइअन्स ऑफ सिवलाइज़ेशन (UNOAC) के उच्च प्रतिनिधि, मिगेल ऐंजल मोरातीनोस ने, बाकू, अज़रबैजान में यूएन समर्थित 5वे वर्ल्ड फोरम ऑन इंटरकल्चरल डायलॉग के दौरान संबोधन करते हुए, कहा कि आस्था कभी भी समस्या नहीं थी, समस्या वे लोग हैं “जो धार्मिक पुस्तकों की विकृत व्याख्या के द्वारा आस्थावानों को धूर्तता से दिग्भ्रमित करके एक दूसरे के विरुद्ध खड़ा कर देते हैं।”

Photo: Working from dusk until dawn, fishermen from around the town of Aral in Kazakhstan haul in a catch from the North Aral Sea, where the water level has risen and salinity has decreased – in stark contrast to the larger South Aral Sea, which has gone nearly dry. Credit: Aramco World

रदवान जकीम द्वारा

न्यू यॉर्क (IDN) - विनाश का क्षेत्र जिसे "ग्रह की सबसे खराब पर्यावरणीय आपदाओं में से एक" कहा जाता है के परिणाम के रूप में बनाया गया है, वह मध्य एशिया की सीमाओं को पार कर गया है, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल उपायों की मांग कर रहा है।

हर साल सूखे हुए अरल सागर के तल से 150 मिलियन टन से अधिक जहरीली धूल हवा द्वारा लंबी दूरी तक एशिया, यूरोप और यहां तक कि बहुत ही कम आबादी वाले आर्कटिक क्षेत्र के लोगों तक बहा कर ले जायी जाती है।

Photo: Fred Kuwornu. Credit: facebook.com/fred.kuwornu

*फ्रैड कूवोरनू के विचार-मत *

न्यूयॉर्क (आईडीएन)- मानव तस्करी से विभिन्न माफिया विश्वभर में 150 बिलीयन डॉलर अर्जित करते हैं, उसमें से 100 बिलियन (अरब) डॉलर अफ्रीकन लोगों की तस्करी से आते हैं। हर तस्करी के जाल में फंसी अफ्रीकन महिला नाईजीरियन माफिया के लिए 60,000 यूरो की आसामी होती है। 10,000 तस्करीयाँ इटली में हर साल 600 मिलीयन यूरो माफिया को देती हैं। कोई भी अफ्रीकन जानबूझ कर इस दलदल में नहीं फंसेगा यदि उन्हें पता हो कि यूरोप में क्या भयावह सच्चाई उनका ईंतजार कर रही है।

Photo: India's top beach destination Goa commits to #BeatPlasticPollution. Credit: World Environment Day.

सुधा रामचंद्रन द्वारा

बैंगलोर (आईडीएन) - 32 वर्षिय राजेस्वरी सिंह ने विश्व पृथ्वी दिवस पर एक छः-सप्ताह तक चलने वाले मैराथन अभियान की शुरुआत की, जिसमे वे एक सामान्य संदेश 'प्लास्टिक का प्रयोग करना बंद करें' को फैलाते हुए, 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर नई दिल्ली पहुँचने के लिए पश्चिम भारत के वड़ोदरा से तकरीबन 1,100 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगी, और इस पदयात्रा के दौरान उनका जोर पूरे रास्ते किसी भी प्रकार के प्लास्टिक की पैकिंग वाले पेय पदार्थों या खाद्य पदार्थों का प्रयोग नहीं करने पर रहेगा।

वास्तव में, उन्होंने पिछले दशक से किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया है। इसके अतिरिक्त, उनका संदेश इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस के विषय - 'प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को परास्त करें' ('Beat plastic pollution') - को स्वर प्रदान करता है। विश्व में 10 सबसे अधिक प्लास्टिक का प्रयोग करने वाले देशों में स्थान रखने वाला भारत, इस बार वैश्विक मेज़बान की भूमिका निभा रहा है।

Image: Map of the Ganges (orange), Brahmaputra (violet), and Meghna (green) drainage basins. Credit: CC BY-SA 3.0

सुधा रामचंद्रन द्वारा

बैंगलोर (आईडीएन) - जैसे ही एक और झुलसाने वाली गर्मी द्वारा सारे भारत को अपनी गिरफ्त में लेने का भय सताने लगा और नदियाँ सूखने लगीं, देश की जल संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए सरकार के इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर्स (आईएलआर) कार्यक्रम के बारे में एक वाद-विवादपूर्ण बहस आरंभ हो गई है।

देश में जल की कमी और जल के असमान वितरण की और ध्यान आकर्षित करते हुए, इस कार्यक्रम के एक प्रबल समर्थक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ने हाल ही में इंगित किया कि जहाँ कई नदियों में बाढ़ आ रही है वहीं अन्य सूख रही हैं। उन्होंने कहा, "अगर इंटर-लिंकिंग (नदियों को जोड़ा जाता है) की जाती है, तो इस समस्या का समाधान हो सकता है"।

भारत की नदियों में जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में बहुत अधिक अतंर है। राष्ट्रीय जल मिशन की वर्ष 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, साबरमती के जलाशय में केवल 263 घन मीटर की तुलना में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना प्रणाली में 2010 में जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 20,136 घन मीटर थी।

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